HRDC पटियाला पंजाबी यूनिवर्सिटी की ओर से लैंग्वेज विषय पर आयोजित रिफ्रेशर कोर्स के इस समारोह सत्र में मुझे मेरा मनोगत व्यक्त करने का जो मौका प्रदान किया उसके लिए में सबसे पहले इस रिफ्रेशर कोर्स के डायरेक्टर आदरणीय शिवानी मैडम, हमारे दोस्त आदरणीय डॉ. सुमित गर्ग और सभी पदाधिकारीयो का और सहभागी सभी दोस्तोंका तहे दिल से आभार व्यक्त करता हूं ।
यह रिफ्रेशर कोर्स 8 जनवरी 2025 को शुरू हुआ था. पहले दिन उद्घाटन सत्र हुआ और उसके बाद ३ लेक्चर हुए। हर रोज सुबह 9:00 बजे से
शाम को 5:00 तक डेढ़ घंटे के चार लेक्चर हो रहे थे। इन सभी लेक्चर से हमें भाषा, साहित्य इनके बारे में बहुत सारा ज्ञान प्राप्त हुआ।
इस रिफ्रेशर कोर्स से हमें हिंदी, पंजाबी, इंग्लिश, कनाडा, चाइनीस, नेपाली, संस्कृत, बांग्ला, उर्दू, असमीज, तिब्बती, पंजाबी, अमेरिकन साहित्य ऐसे अलग-अलग भाषाओं के साहित्य के बारे में काफी जानकारी मिली. उनके बारे में अधिक जानने की उत्कंठा हमारे मन में जागृत हुई।
भाषा क्या होती है भाषा का कार्य उपयोजन विशेषताएं छात्रों की भाषा कैसे विकसित करें विविध लिपियों का अध्ययन कैसे करें, भाषा और साहित्य का सिलेबस कैसे प्रेम करें उसे कैसे पढ़ाए, ऐसी एक भाषा और साहित्य के अध्यापक को जो बातें सूक्ष्म रूप से मालूम होनी चाहिए यह सब कुछ हमें इस रिफ्रेशर कोर्स से पता चला.
आज हम इस विश्व को ग्लोबल विलेज कहते हैं. translation इस युग में काफी ज्यादा आवश्यक है. इस विषय पर चार-पांच लेक्चर हुए और इस विषय के बारे में भी बहुत ज्यादा पता चला.
Artificial intelligence, chat GPT,machine learning इन अत्याधुनिक चीजों को आज कोई भी नजरअंदाज नहीं कर सकता इससे क्या फायदा होगा क्या मुश्किल आएंगे क्या नुकसान होगा इनका इस्तेमाल कैसे करें इस पर भी बहुत ज्यादा सकारात्मक चर्चा हुई.
भाषा, साहित्य का रिसर्च कैसे करना चाहिए, कौन से विषय क्षेत्र में हम रिसर्च कर सकते हैं इस बारे में सभी को आइडिया क्लियर हो गई होगी. प्रोजेक्ट्स को ग्रैंड देने वाली संस्थाओं के बारे में भी हमें पता चला.
साहित्य, सिनेमा और इतर कलाओं का संबंध क्या होता है, सार्वभौमीकरण का भारतीय भाषाओं पर क्या असर पड़ा है, एडल्ट लर्नर या स्टूडेंट को भाषा कैसे पढ़ाई जाए, उनका मूल्यमापन कैसे किया जाए, मूल में साहित्य क्या है, साहित्य क्या होता है, साहित्य की जरूरत क्यों है, साहित्य और हमारा संबंध क्या है, साहित्य क्यों पढ़ना और पढ़ाना चाहिए, प्राचीन मध्य और आधुनिक भारतीय साहित्य क्या है, उसकी क्या विशेषताएं हैं, भारतीय और पाश्चात्य साहित्य शास्त्र, भाषा विज्ञान ऐसे बहुत सारे विषयों का ज्ञान हमें इस रिफ्रेशर कोर्स से प्राप्त हुआ.
भारतीय ज्ञान, तत्वज्ञान, भारत के अलग-अलग राज्यों के संत महंतो के विचार, वेद, उपनिषद, गुरु ग्रंथ साहिब, उनके मूल्य क्या है इन सब का एक स्वरूप आंखों के सामने स्पष्ट हुआ।
इस रिफ्रेशर कोर्स में भारत की जो मुख्य प्रादेशिक भाषाएं हैं वो हमें लगातार सुनने को मिली. उनकी खूबसूरती से हम रूबरू हुए. मैं पंजाबी, बंगाली समझ सकता हूं, सीख सकता हूं यह आत्मविश्वास मुझे इस रिफ्रेशर कोर्स से मिला.
आज इस रिफ्रेशर कोर्स की वजह से हम भारत के अलग-अलग जगह के भाषा के विद्वान लोगों का परिचय हुआ, दोस्ती हुई. आगे जाकर हमें सभी को इस संपर्क का, दोस्ती का हमारे खुद के और स्टूडेंट के ज्ञान को बढ़ाने में एक दूसरे को समृद्ध करने में जरुर मदद होगी.
यह कोर्स अगर ऑफलाइन होता तो ज्यादा फायदा होता लेकिन जो भी इस रिफ्रेशर कोर्स में हमें मिला है, हमारा जो भावनात्मक, भौतिक, मानसिक विकास हुआ है वह भी काम नहीं है.
इस रिफ्रेशर कोर्स में सभी मार्गदर्शक काफी ज्ञानी थे. अपने-अपने क्षेत्र में, विषय में अनुभवी थे. सभी का प्रेजेंटेशन स्किल, लोगों से इंटरेक्शन करने का तरीका बहुत ही अच्छा था. उनके माध्यम से ज्ञान का एक बहुत ही बड़ा भंडार हमारे सामने खुला हुआ. ज्ञान की एक नदी मानो बह रही हो. इस भंडार से जितना भी लिया वह काम था. कितना लिया जाए, इस ज्ञान अमृत का कितना प्राशन करें ऐसा हमें हो गया था.
सभी लेक्चर बहुत ही रोचक, ज्ञानवर्धक, प्रेरणादाई थे. बहुत ही डिसिप्लिन के साथ पहले दिन से अंतिम दिन तक इस रिफ्रेशर कोर्स का आयोजन किया गया. यह बहुत ही अनुकरण करने वाली और महत्वपूर्ण बात है.
इस रिफ्रेशर कोर्स के सीलेक्शन लेटर में ऑन ड्यूटी DL का जो मेंशन किया था उसकी वजह से यह कोर्स ऑनलाइन था फिर भी हमें DL मिली. यह बहुत ही अच्छा हुआ. अन्यथा कॉलेज में सभी काम करते हुए यह कोर्स अच्छी तरह से करना पॉसिबल नहीं हुआ होता।
पूरे भारत की एक तस्वीर हमारे आंखों के सामने इस रिफ्रेशर कोर्स से खड़ी हुई. भारत में विविधता होने के बावजूद जो एकता है, इस एकता की जड़े कितनी गहरी और मजबूत है इसका अनुभव इस रिफ्रेशर कोर्स से हुआ.
मेरा आपसे एक निवेदन है कि हमने जो बुक रिव्यू दिए हैं उनकी एक किताब प्रकाशित की जाए. इससे हमें सभी को भारत के अच्छे साहित्यकृतियों की समीक्षा एक ही पुस्तक में पढ़ने को मिलेगी। यह बहुत ही अच्छा संपादन होगा।
हर रोज 9:00 हम अपने आप मोबाइल या लैपटॉप के सामने बैठ जाते थे और ज्ञान सागर में डुबकी लगाते थे. ज्ञानामृत का आनंद लेते हुए दिन कब खत्म हो जाता था यह पता भी नहीं चलता था।
अब तो 15 दिनों में एक आदत सी हो गई है. अब कल से फिर कॉलेज में जाना होगा. अब यह प्रक्रिया इन सब दोस्तों के साथ चल रही थी और रुकेगी यह सोचकर भी बहुत दुख हो रहा है. लेकिन जिसकी शुरुआत है उसका अंत भी है और यह रिफ्रेशर कोर्स आज संपन्न हो रहा है. मराठी के संत विचारक संत ज्ञानेश्वर के शब्दों में ‘न्यून ते पुरते, अधिक ते सरते’ यानी जो कम होता है वह साथ रहता है और जो अधिक रहता है वह खत्म हो जाता है. इसलिए आज इस मंच पर हमें रुकना है लेकिन जो हमारी दोस्ती बनी है, जो परस्पर प्रेम, सहायता, स्नेह निर्माण हुआ है उसे आखिरी सांस तक निभाना है।
मुझे इस समारोह में मेरा मनोगत व्यक्त करने का मौका दिया इसलिए सभी का धन्यवाद !
- डॉ. राहुल पाटील (२३/०३/२०२५)